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son take his mom on india tourराज्य ट्रेन्डिंग 

बेटे ने माँ को स्कूटर से भारत भ्रमण कराने का बीड़ा उठाया

बेंगलुरु में जॉब से रिजाइन करके माँ के साथ स्कूटर पर भारत भ्रमण के लिए निकले.

कर्नाटक न्यूज़ (Karnataka News): आप और हम सभी लोगो ने किस्सों, कहानियो तथा अपने बड़े-बुजर्गो से सुने है की त्रेता युग में श्रवण कुमार ने अपने अंधे माता-पिता को कावड़ में बिठाके चारो धाम की यात्रा पर निकले थे. परन्तु आज के समय में आपने कभी भी नहीं सुना होगा की इस समय भी कोई ऐसा पुत्र या बेटा अपने माँ-पिता के लिए ऐसा कुछ कर सकता है, लेकिन हम आप को आज के समय में एक ऐसे बेटे के बारे में जानकारी देने जा रहे है जो अपनी माँ की इच्छा पूरी करने के लिए अपनी अच्छी खासी कॉरपोरेट की नौकरी छोड़कर पिता की पुरानी स्कूटर लेकर अपनी माँ को बिठाकर भारत भ्रमण की माँ की इच्छा पूरी करने के लिए निकल पड़ा.

क्या है पूरा मामला ?

कर्नाटक के मैसूर गांव के रहने वाले 40 वर्षीय डी कृष्णा अपनी 67 वर्षीय मां को पूरे भारत का भ्रमण स्कूटर से करवा रहे हैं. डी कृष्णा ने बताया कि चार साल पहले जब बेंगलुरु में बातचीत के दौरान मां से एक मंदिर जाने का अनुरोध किया, तो मां ने कहा कि मैं बड़े मंदिर क्या जाउंगी. मैंने तो अब तक वेल्लूर का मंदिर तक नहीं देखा है, कभी तेरे पिता ने घुमाया ही नहीं. माँ से यह बात सुनकर डी कृष्णा ने कहा कि मेरे पिता ने भले ही आपको वेल्लूर नहीं घुमाया हो, पर मैं आपको अब पूरे भारत का भ्रमण जरूर कराऊंगा. इस सारी घटना के बाद कृष्णा बेंगलुरु में कॉरपोरेट टीम लीडर की नौकरी से इस्तीफा देकर पिता के ही पुराने स्कूटर से देशभ्रमण के लिए मां के साथ निकल पड़े. डी. कृष्णा ने बताया कि पुराने स्कूटर से भ्रमण इसलिए मां को करवा रहा हूं, ताकि पिता की कमी न खले और हमे भी पिता की मौजूदगी का एहसास हो सके. कृष्णा ने यह भी बताया कि सांसारिक बंधनों से मुक्त रहने की खातिर ही मैंने शादी नहीं की. चूंकि बचपन में अपने पिता को 10 सदस्यों के संयुक्त परिवार को चलाने में हो रही परेशानियों को देखा था, यही वजह रही कि मेरी मां को पिता कहीं घुमाने तक नहीं ले जा सके. कृष्णा की मां कुंडारत्ना ने कहा कि मुझे स्कूटर पर देश भ्रमण करने में बहुत ही अच्छा लग रहा है, और मेरी इच्छा मेरे बेटे ने पूरी कर दी.

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