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SEBI has proposed that the company's old auction tradition will be closed.शेयर मार्केट 

सेबी (SEBI) ने प्रस्ताव दिया की कंपनियों के एसेट नीलामी पुरानी परंपरा बंद होगी.

कंपनियों के एसेट नीलामी के लिए डुगडुगी या ढोल बजाकर मुनादी करने की बहुत पुरानी परंपरा बंद हो सकती है, इसकी वजह सेबी (SEBI) ने कहा की यह तरीका अब पुरानी हो गई है.

शेयर बाजार न्यूज़ (share market news): आज के समय में पुरानी तरह की कई परंपरा बंद हो गई या बदल गई है. अब किसी कम्पनी के सम्पत्ति नीलामी के लिए डुगडुगी बजा कर या मुनादी लगा कर ऐलान करने की परंपरा बंद हो सकती है. इस प्रकार जनता को आकर्षिक करने के अपने फायदे होते होंगे पर बाजार नियामक सेबी (SEBI) को लगता है कि यह तरीके अब बीते जमाने की बात हो गए हैं, और आज के समय के हिसाब से नए-नए तरीकों से बेहतर परिणाम देखने को मिल सकते हैं.

क्या कैसे काम करती थी यह परंपरा ?

सेबी का शुल्क (कर) भरने में गलती या आदेश के अनुसार भुगतान न करने वाली इकाइयों की सम्पत्ति बेच कर वसूली करने के अधिकार है. सेबी इन अधिकारों के उपयोग करने की समीक्षा के समय नीलामी के दौरान अपनाए जाने वाले इन पुराने तरीकों की बात सामने आई. सेबी के अधिकारियो ने बताया की जुर्माना, शुल्क, वसूली की राशि या रिफंड के आदेश के संबंध में वसूली के नए नियम तैयार करने के लिये वित्त मंत्रालय से परामर्श कर रहा है. अभी सेबी के पास कर्ज की किस्तें चुकाने में चूक करने वाले डिफॉल्टर की संपत्ति और बैंक खाते जब्त करने, डिफॉल्टर को गिरफ्तार करने या उसे हिरासत में लेने और डिफॉल्टर की चल एवं अचल संपत्तियों के प्रबंधन के लिये किसी को नियुक्त करने का सम्पूर्ण अधिकार है. एक अधिकारी ने बताया की इनकम टैक्स एक्ट के कुछ प्रावधान पुराने हो गये हैं, जैसे कि ढोल बजाना और सार्वजनिक नीलामी. अखबारों में विज्ञापन और ई-नीलामी जैसे नये तरीके बेहतर परिणाम दे सकते हैं.’  सेबी ने वसूली के तेज और प्रभावी तरीकों को अमल में लाने के लिये सरकार को नियमों में आवश्यक संशोधन करने को कहा है. आईटी एक्ट के मौजूदा प्रावधानों के तहत किसी भी संपत्ति को जब्त करने से पहले किसी जाने-माने स्थान या जब्त की जाने वाली संपत्ति के पास डुगडुगी पिटवा कर या मुनादी (पुकार) लगवा कर कुर्की आदि के आदेश की घोषणा करनी होती है.

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