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In the Jet Airway crisis, Naresh Goyal and his wife Anita Goyal are also out of the board.शेयर मार्केट 

Jet Airway संकट में, Naresh Goyal और उनकी पत्नी Anita Goyal भी बोर्ड से बाहर.

Jet Airway कर्ज में डूबने के बाद अब चेयरमैन नरेश गोयल ने पद छोड़ दिया और उनकी पत्नी अनीता ने भी बोर्ड से दूरी बना ली है.

मुंबई न्यूज़ (Mumbai news): Jet Airways के भारी कर्ज में डूबने के बाद एक नया मोड़ आ गया है. कंपनी के चेयरमैन Naresh Goyal ने अपने पद से इस्‍तीफा दे दिया है. और दूसरी तरफ नरेश गोयल की पत्‍नी Anita Goyal ने भी बोर्ड से दूरी बना ली है. जेट एयरवेज को बैंको से तुरंत 1,500 करोड़ रुपये तक का आर्थिक मदद मिलने वाली है. अब जेट एयरवेज के निदेशक मंडल में बैंक दो सदस्यों को नामित करेंगे तथा जेट एयरवेज के दैनिक परिचालन के लिये अंतरिम प्रबंधन समिति बनाई जाएगी. नरेश गोयल के पास जेट एयरवेज की 51 प्रतिशत हिस्सेदारी है. और अबुधाबी स्थित एतिहाद एयरवेज के पास 24 प्रतिशत हिस्सेदारी है.

Naresh Goyal का अचानक इस्‍तीफा का कारण?

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार खाड़ी देश एयरलाइन कंपनी एतिहाद एयरवेज नकदी संकट से जूझ रही है. वह जेट एयरवेज को उबारने के लिए 1,600 से 1,900 करोड़ रुपये का निवेश करने वाली है. और निवेश करने के साथ एक शर्त यह थी की नरेश गोयल को एयरलाइन कंपनी जेट एयरवेज के चेयरमैन पद से इस्तीफा देना होगा. दूसरा कारण जिन बैंको ने जेट एयरवेज को कर्जा दिया था उनका भी नरेश गोयल पर इस्तीफा देने का दबाव बढ़ रहा था.

नरेश गोयल के इस्तीफे के बाद जेट एयरवेज के शेयर में तेज़ी

नरेश गोयल के इस्तीफे की खबर जैसे आई तो शेयर बाजार में जेट एयरवेज के शेयर में 17 फीसदी तक का इजाफा हुआ. बाजार में कारोबार के दौरान जेट एयरवेज का शेयर प्राइस 266 रुपये तक पहुंच गया जबकि बाजार बंद होने पर कंपनी का शेयर 254.50 रुपये के भाव पर रहा. जेट एयरवेज के शेयर में इतनी बड़ी उछाल दो महीने पहले देखने को मिली थी.

State Bank Of India ने मदद का संकेत दिया था

पिछले हफ्ते देश की सबसे बड़ी बैंक SBI ने जेट एयरवेज को इस कर्ज के संकट से छुटकारा दिलाने का संकेत दिया था. इसके लिए एसबीआई के चेयरमैन Rajnish Kumar ने विमानन सचिव प्रदीप सिंह खरोला और प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव नृपेन्द्र मिश्र के साथ बीते बुधवार को वित्त मंत्री Arun Jaitley से मुलाकात की. एसबीआई चेयरमैन रजनीश कुमार ने जोर देकर कहा था कि जेट एयरवेज को परिचालन में बनाए रखना कर्जदाताओं तथा यात्रियों के हित में है. जेट एयरवेज को बैंकरप्‍सी कानून (आईबीसी) के अंतर्गत ले जाना अंतिम विकल्प है.

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